Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.96.3: पश्चिमी समुद्र के तट पर प्रभास तीर्थ पर अनेक ऋषिगण एकत्रित हुए थे। वहाँ उपस्थित ऋषियों ने आपस में विचार-विमर्श किया कि हमें समस्त पृथ्वी की यात्रा करनी चाहिए, जो अनेक तीर्थों से परिपूर्ण है। यही हम सबकी अभिलाषा है। अतः सभी को एक साथ यात्रा प्रारंभ करनी चाहिए।॥3॥ | mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पश्चिमी समुद्र के तट पर प्रभास तीर्थ पर अनेक ऋषिगण एकत्रित हुए थे। वहाँ उपस्थित ऋषियों ने आपस में विचार-विमर्श किया कि हमें समस्त पृथ्वी की यात्रा करनी चाहिए, जो अनेक तीर्थों से परिपूर्ण है। यही हम सबकी अभिलाषा है। अतः सभी को एक साथ यात्रा प्रारंभ करनी चाहिए।॥3॥
Many sages had gathered at Prabhas Tirtha on the shore of the western sea. The sages present there discussed among themselves that we should travel the entire earth which is filled with many holy pilgrimages. This is the desire of all of us. Therefore, everyone should start the journey together.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥