Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.96.28: नहुष बोले, "जिसने आपके चरणकमलों का अपहरण किया है, वह संन्यासी होकर भी घर पर ही रहता है। यज्ञ में दीक्षा लेकर भी वह स्वेच्छाचारी है और वेतन लेकर विद्या सिखाता है, अर्थात् इन सब पापों के फल में वह भागीदार है।" 28. | mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नहुष बोले, "जिसने आपके चरणकमलों का अपहरण किया है, वह संन्यासी होकर भी घर पर ही रहता है। यज्ञ में दीक्षा लेकर भी वह स्वेच्छाचारी है और वेतन लेकर विद्या सिखाता है, अर्थात् इन सब पापों के फल में वह भागीदार है।" 28.
Nahusha said, "The one who has kidnapped your lotus feet, even after becoming a Sanyasi, stays at home. Even after taking initiation in Yagya, he is willful and teaches knowledge for a salary, that is, he is a sharer in the consequences of all these sins." 28.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥