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ययातिरुवाच
अनृतौ च व्रती चैव भार्यायां स प्रजायतु।
निराकरोतु वेदांश्च यस्ते हरति पुष्करम्॥ २७॥
अनुवाद
ययाति ने कहा, "जिसने आपके कमलों का अपहरण किया है, वह व्रत करता हुआ भी रजस्वला होने पर भी ऋतु के अतिरिक्त किसी अन्य समय स्त्री के साथ समागम करता है और वेदों का उल्लंघन करता है, अर्थात् वह इन सब पापों का फल भोगेगा।"
Yayati said, "The one who has stolen your lotuses, even though he is observing fasts, has sexual intercourse with a woman at a time other than the menstrual period and contradicts the Vedas, i.e. he will bear the consequences of all these sins." 27.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥