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mahabharat 13.96.18: कश्यप बोले- जिसने आपका कमल चुराया है, वह सब जगह सब प्रकार की वस्तुओं का क्रय-विक्रय कर रहा है। वह किसी का धन हड़पने का लोभी है और झूठी गवाही देता है, अर्थात् वह उपर्युक्त पापों का भागी है॥ 18॥   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.96.18 
कश्यप उवाच
सर्वत्र सर्वं पणतु न्यासे लोभं करोतु च।
कूटसाक्षित्वमभ्येतु यस्ते हरति पुष्करम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
कश्यप बोले- जिसने आपका कमल चुराया है, वह सब जगह सब प्रकार की वस्तुओं का क्रय-विक्रय कर रहा है। वह किसी का धन हड़पने का लोभी है और झूठी गवाही देता है, अर्थात् वह उपर्युक्त पापों का भागी है॥ 18॥
 
Kashyap said- The person who has stolen your lotus is buying and selling all kinds of things everywhere. He is greedy to usurp someone's inheritance and gives false testimony, i.e. he is a part of the above mentioned sins.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)