Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.96.14: यह सुनकर सभी ऋषिगण भयभीत हो गए और अगस्त्यजी से बोले - 'महर्षि! हमने आपका कमल नहीं चुराया है। आप हम पर झूठा आरोप न लगाएँ। हम अपना नाम शुद्ध करने के लिए कठोरतम शपथ ले सकते हैं।'॥14॥ | mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमाहुरार्ता ऋषयो महर्षिं
न ते वयं पुष्करं चोरयाम:।
मिथ्याभिषंगो भवता न कार्य:
शपाम तीक्ष्णै: शपथैर्महर्षे॥ १४॥
अनुवाद
यह सुनकर सभी ऋषिगण भयभीत हो गए और अगस्त्यजी से बोले - 'महर्षि! हमने आपका कमल नहीं चुराया है। आप हम पर झूठा आरोप न लगाएँ। हम अपना नाम शुद्ध करने के लिए कठोरतम शपथ ले सकते हैं।'॥14॥
Hearing this, all the sages got frightened and said to Agastyaji - 'Maharishi! We have not stolen your lotus. You should not accuse us falsely. We can take the harshest oath to clear our name'॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥