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mahabharat 13.96.10: मैं सुनता हूँ कि काल धर्म की शक्ति का नाश कर देता है। वह समय इस समय आ गया है। इसीलिए धर्म की हानि हो रही है - अस्तेय-धर्म का हनन हो रहा है। अतः इससे पहले कि इस संसार में अधर्म फैल जाए, हमें दीर्घकाल के लिए स्वर्ग चले जाना चाहिए॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.96.10 
शृणोमि कालो हिंसते धर्मवीर्यं
सोऽयं प्राप्तो वर्तते धर्मपीडा।
पुराधर्मो वर्तते नेह यावत्
तावद् गच्छाम: सुरलोकं चिराय॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैं सुनता हूँ कि काल धर्म की शक्ति का नाश कर देता है। वह समय इस समय आ गया है। इसीलिए धर्म की हानि हो रही है - अस्तेय-धर्म का हनन हो रहा है। अतः इससे पहले कि इस संसार में अधर्म फैल जाए, हमें दीर्घकाल के लिए स्वर्ग चले जाना चाहिए॥10॥
 
‘I hear that time destroys the power of Dharma. That time has arrived at this time. That is why Dharma is being harmed – the Dharma of non-stealing is being violated. Therefore, before Adharma spreads in this world, we should go to heaven for a long time.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)