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mahabharat 13.96.1: भीष्मजी कहते हैं - युधिष्ठिर! इस प्रसंग में प्राचीन इतिहास का एक उदाहरण दिया जाता है। मैं तुम्हें ऐसी ही एक शपथ के सम्बन्ध में तीर्थयात्रा के दौरान घटित एक घटना सुनाता हूँ। सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 96: ब्रह्मसरतीर्थमें अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ तथा धर्मज्ञानके उद्देश्यसे चुराये हुए कमलोंका वापस देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.96.1 
भीष्म उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
यद् वृत्तं तीर्थयात्रायां शपथं प्रति तच्छृणु॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - युधिष्ठिर! इस प्रसंग में प्राचीन इतिहास का एक उदाहरण दिया जाता है। मैं तुम्हें ऐसी ही एक शपथ के सम्बन्ध में तीर्थयात्रा के दौरान घटित एक घटना सुनाता हूँ। सुनो।
 
Bhishmaji says - Yudhishthira! An example of ancient history is given in this context. I will tell you about an incident that happened during a pilgrimage regarding a similar oath. Listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)