श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  13.95.98 
गण्डोवाच
वक्त्रैकदेशे गण्डेति धातुमेतं प्रचक्षते।
तेनोन्नतेन गण्डेति विद्धि मानलसम्भवे॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
गण्ड बोला - "हे अग्नि से उत्पन्न कृत्ये! गण्ड शब्द गदि धातु से बना है, यह मुख के एक भाग - गाल - का बोध कराता है। मेरा गाल (गण्ड) ऊँचा है, इसीलिए लोग मुझे गण्ड कहते हैं।" 98.
 
Ganda said - Kritye born from fire! The word Ganda is formed from the metal Gadi, it denotes a part of the face - cheek. My cheek (Ganda) is high, that is why people call me Ganda. 98.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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