Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.95.85: यातुधानी ने कहा, "मुनि! आपने अपने नाम का जो वर्णन किया है, उसका उच्चारण करना भी कठिन है। मुझे यह नाम याद नहीं आ रहा। कृपया आप तालाब में जाकर प्रवेश करें।" 85. | mahabharat अध्याय 13.95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यातुधान्युवाच
नामनैरुक्तमेतत् ते दु:खव्याभाषिताक्षरम्।
नैतद् धारयितुं शक्यं गच्छावतर पद्मिनीम्॥ ८५॥
अनुवाद
यातुधानी ने कहा, "मुनि! आपने अपने नाम का जो वर्णन किया है, उसका उच्चारण करना भी कठिन है। मुझे यह नाम याद नहीं आ रहा। कृपया आप तालाब में जाकर प्रवेश करें।" 85.
Yaatudhaani said, "Muni! The description you have given of your name is so difficult to pronounce even in its letters. I cannot remember this name. Please go and enter the pond." 85.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥