यातुधान्युवाच
नामनैरुक्तमेतत् ते दु:खव्याभाषिताक्षरम्।
नैतद् धारयितुं शक्यं गच्छावतर पद्मिनीम्॥ ८५॥
अनुवाद
यातुधानी ने कहा, "मुनि! आपने अपने नाम का जो वर्णन किया है, उसका उच्चारण करना भी कठिन है। मुझे यह नाम याद नहीं आ रहा। कृपया आप तालाब में जाकर प्रवेश करें।" 85.
Yaatudhaani said, "Muni! The description you have given of your name is so difficult to pronounce even in its letters. I cannot remember this name. Please go and enter the pond." 85.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥