श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  13.95.83 
यातुधान्युवाच
यथोदाहृतमेतत् ते मयि नाम महाद्युते।
दुर्धार्यमेतन्मनसा गच्छावतर पद्मिनीम्॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
यातुधानि बोले - हे महामुनि! आपने जिस प्रकार अपने नाम का अर्थ समझाया है, उसे समझना मेरे लिए कठिन है। अच्छा, अब आप तालाब में जाकर उतर जाइए।
 
Yaatudhaani said—O brilliant sage! The way you have explained the meaning of your name, it is difficult for me to understand it. Well, now you go and get into the pond.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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