श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  13.95.77 
एका तिष्ठसि का च त्वं कस्यार्थे किं प्रयोजनम्।
पद्मिनीतीरमाश्रित्य ब्रूहि त्वं किं चिकीर्षसि॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
अरे ! तुम कौन हो और यहाँ अकेले क्यों खड़े हो ? यहाँ आने का क्या प्रयोजन है ? इस सरोवर के तट पर रहकर तुम कौन-सा कार्य करना चाहते हो ? ॥77॥
 
‘Hey! Who are you and why are you standing here alone? What is the purpose of your coming here? What task do you want to accomplish by staying on the banks of this lake?’॥ 77॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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