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श्लोक 13.95.76  |
ततस्ते यातुधानीं तां दृष्ट्वा विकृतदर्शनाम्।
स्थितां कमलिनीतीरे कृत्यामूचुर्महर्षय:॥ ७६॥ |
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| अनुवाद |
| सरोवर के तट पर खड़ी हुई और अत्यन्त भयंकर रूप वाली यातुधानी कृत्या को देखकर समस्त महर्षियों ने कहा-॥ 76॥ |
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| Seeing the Yaatudhaani Kritya standing on the bank of the lake and looking very fierce, all the Maharishis said -॥ 76॥ |
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