श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  13.95.73 
नानाविधैश्च विहगैर्जलप्रकरसेविभि:।
एकद्वारामनादेयां सूपतीर्थामकर्दमाम्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
तरह-तरह के पक्षी चहचहाते हुए उसका पानी पीते थे। उसमें प्रवेश करने के लिए केवल एक ही द्वार था। उसमें से कुछ भी ले जाया नहीं जा सकता था। उसमें नीचे जाने के लिए बहुत ही सुंदर सीढ़ियाँ बनी थीं। वहाँ काई या कीचड़ का नामोनिशान नहीं था। 73.
 
Various types of birds used to drink its water while chirping. There was only one door to enter it. Nothing from it could be taken. Very beautiful stairs were made to go down into it. There was no trace of moss or mud there. 73.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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