श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  13.95.72 
बालादित्यवपु:प्रख्यै: पुष्करैरुपशोभिताम्।
वैदूर्यवर्णसदृशै: पद्मपत्रैरथावृताम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
प्रातःकाल के सूर्य के समान लाल रंग के कमल पुष्प सरोवर की शोभा बढ़ा रहे थे और चारों ओर कमल के पत्ते फैले हुए थे, जिनकी चमक लाजवर्द के समान थी।
 
The lotus flowers, whose colour was reddish like the morning sun, were enhancing the beauty of the lake and the lotus leaves, whose luster was like that of lapis lazuli, were spreading all around it. 72.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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