श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  13.95.70 
एकनिश्चयकार्याश्च व्यचरन्त वनानि ते।
आददाना: समुद्‍धृत्य मूलानि च फलानि च॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
उन सबका संकल्प और कर्म एक ही था। वे कंद-मूल और फल एकत्रित करके उन्हें लेकर वन में विचरण कर रहे थे। 70.
 
All of them had the same resolve and actions. They collected roots and fruits and were roaming in the forest with them. 70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)