श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  13.95.67 
गौतम उवाच
नैतस्येह यथास्माकं त्रिकौशेयं च रांकवम्।
एकैकं वै त्रिवर्षीयं तेन पीवाञ्छुना सह॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
गौतम बोले, "हमारी तरह इसे तीन वर्ष तक कुशा की रस्सी और मृगचर्म से बनी तीन धागों वाली मेखला नहीं पहननी पड़ती। इसीलिए यह कुत्ते के साथ मोटा हो गया है।" 67.
 
Gautama said, "Like us, he does not have to wear a three-strand belt made of kusha rope and a deerskin for three years. That is why he has grown fat along with the dog." 67.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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