श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  13.95.63 
विश्वामित्र उवाच
नैतस्येह यथास्माकं शश्वच्छास्त्रं जरद्‍गव:।
अलस: क्षुत्परो मूर्खस्तेन पीवाञ्छुना सह॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र बोले, "हम भूख के कारण सनातन शास्त्रों को भूल गए हैं और शास्त्रों में वर्णित धर्म भी क्षीण हो गया है। यह उसकी स्थिति नहीं है और वह आलसी है, केवल अपनी भूख मिटाने में लगा रहता है और मूर्ख है। इसीलिए वह कुत्ते के साथ मोटा हो गया है।"
 
Vishwamitra said, "We have forgotten the Sanatan scriptures due to hunger and the religion prescribed in the scriptures has also weakened. This is not his condition and he is lazy, engaged only in satisfying his hunger and is a fool. That is why he has become fat along with the dog. 63.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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