vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत
»
श्लोक 60
श्लोक
13.95.60
अरुन्धती तु तं दृष्ट्वा सर्वांगोपचितं शुभम्।
भवितारो भवन्तो वै नैवमित्यब्रवीदृषीन्॥ ६०॥
अनुवाद
सब अंगों से सुगठित उस सुन्दर तपस्वी को देखकर अरुन्धती ने ऋषियों से कहा - "क्या आप कभी ऐसे नहीं हो सकेंगे?"॥60॥
Seeing that handsome ascetic, well built in all parts of the body, Arundhati said to the sages, "Will you never be able to become like this?"॥ 60॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd