श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.95.59 
अथापश्यन् सुपीनांसपाणिपादमुखोदरम्।
परिव्रजन्तं स्थूलांगं परिव्राजं शुना सह॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
एक दिन उन ऋषियों ने एक साधु को कुत्ते के साथ घूमते देखा। उसका शरीर बहुत मोटा था। उसके मोटे कंधे, हाथ, पैर, मुख और पेट आदि सभी अंग सुंदर और सुडौल थे।
 
One day those sages saw a hermit wandering around with a dog. His body was very fat. His thick shoulders, hands, feet, face and stomach etc. all the parts were beautiful and well-shaped. 59.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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