श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  13.95.54 
सा कृत्या कालरात्रीव कृताञ्जलिरुपस्थिता।
वृषादर्भिं नरपतिं किं करोमीति चाब्रवीत्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
वह कृत्या कालरात्रि के समान भयंकर रूप धारण करके हाथ जोड़कर राजा के समक्ष प्रकट हुई और बोली - 'महाराज! आपकी किस आज्ञा का पालन करूँ?'॥ 54॥
 
That Kritya, assuming a fierce form like that of Kalaratri, appeared before the king with folded hands and said - 'Maharaj! Which of your orders should I follow?'॥ 54॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd