श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.95.49 
भीष्म उवाच
इत्युक्त्वा हेमगर्भाणि हित्वा तानि फलानि वै।
ऋषयो जग्मुरन्यत्र सर्व एव धृतव्रता:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं: युधिष्ठिर! ऐसा कहकर व्रत करने वाले सभी महर्षि उन स्वर्ण फलों को त्यागकर वहाँ से चले गये।
 
Bhishma says: Yudhishthira! Having said this, all the great sages who were observing fasts, abandoned those golden fruits and went away from there.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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