श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  13.95.40 
कश्यप उवाच
यत्पृथिव्यां व्रीहियवं हिरण्यं पशव: स्त्रिय:।
सर्वं तन्नालमेकस्य तस्माद् विद्वान् शमं चरेत्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
कश्यप बोले - यदि किसी एक मनुष्य को इस पृथ्वी पर चावल, जौ, स्वर्ण, गौ और स्त्रियाँ सब मिल जाएँ, तो भी उसकी तृप्ति नहीं होगी; ऐसा विचार करके विद्वान पुरुष को अपने मन की प्यास को शांत करना चाहिए ॥40॥
 
Kasyapa said, "Even if any one man gets all the rice, barley, gold, cattle and women on this earth, he would still not be satisfied; thinking this, a learned man should pacify the thirst of his mind." ॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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