श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.95.36 
उदुम्बराण्यथान्यानि हेमगर्भाण्युपाहरन्।
भृत्यास्तेषां ततस्तानि प्रग्राहितुमुपाद्रवन्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
मंत्रियों ने अंजीर और अन्य वृक्षों से फल तोड़कर उनमें स्वर्ण मुद्राएँ भर लीं। फिर राजा के सेवक उन्हें ऋषियों को सौंपने के लिए उनके पीछे दौड़े।
 
The ministers plucked fruits from the fig tree and other trees and filled them with gold coins. Then the king's servants ran after the sages to hand them over to them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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