श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  13.95.136 
रक्षणार्थं च सर्वेषां भवतामहमागत:।
यातुधानी ह्यतिक्रूरा कृत्यैषा वो वधैषिणी॥ १३६॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम सबकी रक्षा करने के लिए यहाँ आया था। यह यातुधानी बड़ा क्रूर स्वभाववाला था और तुम सबको मार डालना चाहता था॥136॥
 
I had come here to protect all of you. This Yaatudhaani was of a very cruel nature and wanted to kill you all.॥ 136॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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