श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  13.95.135 
मया ह्यन्तर्हितानीह बिसानीमानि पश्यत।
परीक्षार्थं भगवतां कृतमेवं मयानघा:॥ १३५॥
 
 
अनुवाद
मैंने उन मृणालों को यहाँ छिपाया था। देखो, ये रहे तुम्हारे मृणाल। हे भोले मुनियों! मैंने यह केवल तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए किया था। 135।
 
I had hidden those Mrinals here. See, here are your Mrinals. O innocent sages! I did this only to test you. 135.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd