श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  13.95.129 
गण्डोवाच
अनृतं भाषतु सदा बन्धुभिश्च विरुध्यतु।
ददातु कन्यां शुल्केन बिसस्तैन्यं करोति या॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
गंडा बोला - जिस स्त्री ने मृणाल चुराई है, वह सदैव झूठ बोलने, भाई-बंधुओं से लड़ने-झगड़ने तथा उनका विरोध करने तथा शुल्क लेकर अपनी पुत्री का विवाह करने का पाप करेगी।
 
Ganda said - The woman who has stolen Mrinal will always be guilty of telling lies, fighting and opposing her brothers and relatives and giving away her daughter in marriage after taking a fee.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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