श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  13.95.128 
ज्ञातीनां गृहमध्यस्था सक्तूनत्तु दिनक्षये।
अभोग्या वीरसूरस्तु बिसस्तैन्यं करोति या॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
जो स्त्री मृणालों की चोरी करके आई है, वह कुटुम्बियों का अपमान करके घर में रहने, दिन ढलने के बाद सत्तू खाने, कुपथ होने के कारण पति द्वारा भोग न पाने तथा ब्राह्मणी होकर भी क्षत्रिय स्त्री के समान उग्र स्वभाव वाले वीर पुत्र की माता होने का पाप करेगी॥128॥
 
The woman who has stolen the Mrinals will be guilty of staying at home after insulting her family members, eating Sattu after the day is over, not being able to be enjoyed by her husband due to being a woman of bad reputation, and in spite of being a Brahmin, being the mother of a brave son with a fierce temper like that of a Kshatriya woman.॥ 128॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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