श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  13.95.127 
अरुन्धत्युवाच
नित्यं परिभवेच्छ्वश्रूं भर्तुर्भवतु दुर्मना:।
एका स्वादु समाश्नातु बिसस्तैन्यं करोति या॥ १२७॥
 
 
अनुवाद
अरुन्धती बोलीं : जो स्त्री कमल चुराती है, वह सास का अपमान करने, पति को दुःख पहुँचाने तथा अकेले ही स्वादिष्ट भोजन करने की पापिनी होगी ॥127॥
 
Arundhati said: A woman who steals lotuses will be guilty of insulting her mother-in-law, hurting her husband and eating delicious food all by herself. ॥127॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd