श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  13.95.120 
जमदग्निरुवाच
पुरीषमुत्सृजत्वप्सु हन्तु गां चैव द्रुह्यतु।
अनृतौ मैथुनं यातु बिसस्तैन्यं करोति य:॥ १२०॥
 
 
अनुवाद
जमदग्नि ने कहा, "जो व्यक्ति मृणाल का अपहरण करेगा, उसे जल में शौच करने, गाय को मारने या उसके साथ छल करने तथा रजस्वला होने से पूर्व स्त्री के साथ संभोग करने के पाप का भागी होना पड़ेगा।"
 
Jamadagni said, "The one who abducted Mrinals will be guilty of the sin of defecating in water, killing a cow or cheating on it, and having intercourse with a woman before she is menstruating." 120.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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