श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  13.95.111 
ते शंकमानास्त्वन्योन्यं पप्रच्छुर्द्विजसत्तमा:।
त ऊचु: समयं सर्वे कुर्म इत्यरिकर्शन॥ १११॥
 
 
अनुवाद
शत्रुघ्न! वे श्रेष्ठ ब्राह्मण एक-दूसरे से प्रश्न करने लगे, एक-दूसरे पर संदेह करने लगे और अन्त में बोले - 'आओ, हम सब मिलकर शपथ लें।' ॥111॥
 
Shatrughan! Those great Brahmins began to question each other, suspecting each other and finally said, "Let us all take an oath together." ॥111॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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