श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  13.95.110 
ऋषय ऊचु:
केन क्षुधापरीतानामस्माकं पापकर्मणाम्।
नृशंसेनापनीतानि बिसान्याहारकांक्षिणाम्॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
तब ऋषियों ने आपस में कहा, "ओह! हम सभी बहुत भूखे थे और भोजन करना चाहते थे। ऐसे समय में किस क्रूर व्यक्ति ने हम पापियों से कमल के फूल चुरा लिए?"
 
Then the sages said to each other, "Oh! We were all very hungry and wanted to eat. At such a time, which cruel person stole the lotus flowers from us sinners?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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