श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 95: गृहस्थके धर्मोंका रहस्य, प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा, भिक्षुरूपधारी इन्द्रके द्वारा कृत्याका वध करके सप्तर्षियोंकी रक्षा तथा कमलोंकी चोरीके विषयमें शपथ खानेके बहानेसे धर्मपालनका संकेत  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  13.95.106 
शुन:सखा च हत्वा तां यातुधानीं महाबलाम्।
भुवि त्रिदण्डं विष्टभ्य शाद्वले समुपाविशत्॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उस महाबली दैत्य को मारकर शुन सखेन ने त्रिशूल पृथ्वी पर रख दिया और स्वयं घास से ढकी हुई भूमि पर बैठ गए ॥106॥
 
In this way, after killing that mighty demon, Shuna Sakhen placed the trident on the earth and he himself sat down on the ground covered with grass. 106॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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