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mahabharat 13.94.9: पितरों की यह बात सुनकर स्वयंभू ब्रह्माजी ने इस प्रकार कहा - 'देवताओं! ये अग्निदेव मेरे निकट विराजमान हैं। ये तुम्हारा कल्याण बताएँगे।'॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.94.9 
इति तेषां वच: श्रुत्वा स्वयम्भूरिदमब्रवीत्।
एष मे पार्श्वतो वह्निर्युष्मच्छ्रेयोऽभिधास्यति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पितरों की यह बात सुनकर स्वयंभू ब्रह्माजी ने इस प्रकार कहा - 'देवताओं! ये अग्निदेव मेरे निकट विराजमान हैं। ये तुम्हारा कल्याण बताएँगे।'॥9॥
 
On hearing this from the Pitris, Swayambhu Brahmaji said thus - 'Gods! This Agnidev is sitting near me. He will tell you about your welfare.'॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)