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mahabharat 13.94.7: भरतनंदन! सोम की प्रार्थना पर वे अपने पितरों के साथ मेरु पर्वत के शिखर पर विराजमान ब्रह्माजी के पास गये।   |   mahabharat अध्याय 13.94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.94.7 
ते सोमवचनाद् देवा: पितृभि: सह भारत।
मेरुशृंगे समासीनं पितामहमुपागमन्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! सोम की प्रार्थना पर वे अपने पितरों के साथ मेरु पर्वत के शिखर पर विराजमान ब्रह्माजी के पास गये।
 
Bharatnandan! At the request of Soma, he along with his ancestors went to Lord Brahma who was seated on the peak of Mount Meru.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)