| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद » श्लोक 20-22h |
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| | | | श्लोक 13.94.20-22h  | पितामह: पुलस्त्यश्च वसिष्ठ: पुलहस्तथा॥ २०॥
अंगिराश्च क्रतुश्चैव कश्यपश्च महानृषि:।
एते कुरुकुलश्रेष्ठ महायोगेश्वरा: स्मृता:॥ २१॥
एते च पितरो राजन्नेष श्राद्धविधि: पर:। | | | | | | अनुवाद | | कुरुकुलश्रेष्ठ! ब्रह्मा, पुलस्त्य, वशिष्ठ, पुलह, अंगिरा, क्रतु और महर्षि कश्यप- ये सात ऋषि महान योगेश्वर और पितर माने गए हैं। राजन! इस प्रकार यह श्राद्ध की सर्वश्रेष्ठ विधि बताई गई। 20-21 1/2॥ | | | | Kurukula's best! Brahma, Pulastya, Vashishtha, Pulah, Angira, Kratu and Maharishi Kashyap – these seven sages are considered great Yogeshwar and ancestors. Rajan! In this way it was declared to be the best method of Shraddha. 20-21 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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