Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.94.2: धर्म में सदैव तत्पर रहने वाले तथा नियमित व्रत रखने वाले महर्षि पिण्डदान करके तीर्थ के जल से अपने पितरों का तर्पण करते थे। 2॥ | mahabharat अध्याय 13.94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्म में सदैव तत्पर रहने वाले तथा नियमित व्रत रखने वाले महर्षि पिण्डदान करके तीर्थ के जल से अपने पितरों का तर्पण करते थे। 2॥
Maharishi, who was always active in religion and kept fast regularly, used to offer 'Taparan' to his ancestors with the water of the pilgrimage after offering Pind Daan. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥