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mahabharat 13.94.19-20h: अतः जो लोग ऐसा जानते हैं, वे एकाग्रचित्त होकर सदैव नाव पर बैठकर अपने पितरों को जल अर्पित करते हैं। आधा मास बीत जाने पर कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। पितरों की श्रद्धा से मनुष्य को पुष्टि, आयु, वीर्य और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। 19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  13.94.19-20h 
सदा नावि जलं तज्ज्ञा: प्रयच्छन्ति समाहिता:।
मासार्धे कृष्णपक्षस्य कुर्यान्निर्वपणानि वै॥ १९॥
पुष्टिरायुस्तथा वीर्यं श्रीश्चैव पितृभक्तित:।
 
 
अनुवाद
अतः जो लोग ऐसा जानते हैं, वे एकाग्रचित्त होकर सदैव नाव पर बैठकर अपने पितरों को जल अर्पित करते हैं। आधा मास बीत जाने पर कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। पितरों की श्रद्धा से मनुष्य को पुष्टि, आयु, वीर्य और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। 19 1/2॥
 
Therefore, those who know this, remain focused and always offer water to their ancestors while sitting on a boat. After half of the month has passed, Shraddha must be performed on the Amavasya date of Krishna Paksha. By devotion to the ancestors, man gets confirmation, age, semen and Lakshmi. 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)