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mahabharat 13.94.17: पहले अपने कुल के पितरों को जल देना चाहिए, फिर अपने मित्रों और संबंधियों को जल देना चाहिए॥17॥   |   mahabharat अध्याय 13.94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.94.17 
पूर्वं स्ववंशजानां तु कृत्वाद्भिस्तर्पणं पुन:।
सुहृत्सम्बन्धिवर्गाणां ततो दद्याज्जलाञ्जलिम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पहले अपने कुल के पितरों को जल देना चाहिए, फिर अपने मित्रों और संबंधियों को जल देना चाहिए॥17॥
 
First, one should offer water to the ancestors of one's lineage and then offer water to one's friends and relatives.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)