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श्लोक 13.94.11  |
एतच्छ्रुत्वा तु पितरस्ततस्ते विज्वराऽभवन्।
एतस्मात् कारणाच्चाग्ने: प्राक् तावद् दीयते नृप॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| हे मनुष्यों के स्वामी! अग्निदेव के ये वचन सुनकर पितर चिंता मुक्त हो गए; इसीलिए श्राद्ध में प्रथम भाग अग्नि को अर्पित किया जाता है ॥11॥ |
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| O Lord of men! On hearing these words from Agni, the ancestors became free from worry; that is why in Shraddha, the first portion is offered to Agni. ॥ 11॥ |
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