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mahabharat 13.94.1: भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! जब महर्षि निमि ने पहले-पहल श्राद्ध किया, उसके बाद सभी महर्षि शास्त्रानुसार पितृयज्ञ करने लगे॥1॥   |   mahabharat अध्याय 13.94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 94: पितर और देवताओंका श्राद्धान्नसे अजीर्ण होकर ब्रह्माजीके पास जाना और अग्निके द्वारा अजीर्णका निवारण, श्राद्धसे तृप्त हुए पितरोंका आशीर्वाद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.94.1 
भीष्म उवाच
तथा निमौ प्रवृत्ते तु सर्व एव महर्षय:।
पितृयज्ञं तु कुर्वन्ति विधिदृष्टेन कर्मणा॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! जब महर्षि निमि ने पहले-पहल श्राद्ध किया, उसके बाद सभी महर्षि शास्त्रानुसार पितृयज्ञ करने लगे॥1॥
 
Bhishma says - Yudhishthira! When Maharishi Nimi first engaged in Shraddha, after that all the Maharishi started performing Pitriyagya according to the scriptures.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)