श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  13.93.41 
वर्जयेल्लवणं सर्वं तथा जम्बूफलानि च।
अवक्षुतावरुदितं तथा श्राद्धे च वर्जयेत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
‘सभी प्रकार के नमक, जामुन फल और छींक या आँसू से दूषित वस्तुओं को भी श्राद्ध में त्याग देना चाहिए।
 
‘All types of salt, jamun fruit and items contaminated by sneeze or tears should also be discarded in Shraddha.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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