श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.93.3 
भीष्म उवाच
यथा श्राद्धं सम्प्रवृत्तं यस्मिन् काले यदात्मकम्।
येन संकल्पितं चैव तन्मे शृणु जनाधिप॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - 'हे राजन! मैं तुम्हें श्राद्ध के प्रारम्भ होने का समय, विधि, उसका स्वरूप तथा उसका संकल्प करने वाले अर्थात् उसका प्रचार करने वाले पुरुष के बारे में बताता हूँ। सुनो।
 
Bhishma said, 'O King! I am telling you the time and manner in which Shraddha started, its nature and the person who first resolved upon it, i.e., propagated it. Listen.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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