श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.93.27 
देवास्तु पितरो नाम निर्मिता ये स्वयम्भुवा।
उष्णपा ये महाभागास्तेषां भाग: प्रकल्पित:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी द्वारा उत्पन्न कुछ देवता पितर कहलाते हैं। वे महान पितर उष्णाप भी कहलाते हैं। स्वयंभू ने श्राद्ध में उनका भाग निश्चित किया है॥27॥
 
‘Some gods created by Brahma are known as Pitris. Those great Pitris are also known as Ushnaps. Swayambhu has decided their share in Shraddha.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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