श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.93.26 
उदकानयने चैव स्तोतव्यो वरुणो विभु:।
ततोऽग्निश्चैव सोमश्च आप्याय्याविहतेऽनघ॥ २६॥
 
 
अनुवाद
अनघ! श्राद्ध के लिए जल लाने के लिए वरुणदेव की स्तुति करना उचित है। इसके बाद अग्नि और सोम को भी संतुष्ट करो। 26॥
 
Anagh! It is appropriate to praise Lord Varuna for bringing water for Shraddha. After this you should also satisfy Agni and Soma. 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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