श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.93.25 
स्तोतव्या चेह पृथिवी निवापस्येह धारिणी।
वैष्णवी काश्यपी चेति तथैवेहाक्षयेति च॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात श्राद्ध की आधारशिला पृथ्वी की वैष्णवी, काश्यपी और अक्षया आदि नामों से स्तुति करनी चाहिए।
 
After that, the foundation of Shraddha, the earth, should be praised with the names of Vaishnavi, Kashyapi and Akshaya etc.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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