Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.93.23-24: तो तपोधन! सबसे पहले वेद मन्त्र पढ़कर अग्निकरण-अग्निकरण की विधि पूर्ण करो और अग्नि, सोम, वरुण तथा पितरों के साथ सदा रहने वाले विश्वेदेवों को उनका भाग अर्पण करो। ब्रह्माजी ने साक्षात् उनके अंशों की कल्पना की है। 23-24॥ | mahabharat अध्याय 13.93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तो तपोधन! सबसे पहले वेद मन्त्र पढ़कर अग्निकरण-अग्निकरण की विधि पूर्ण करो और अग्नि, सोम, वरुण तथा पितरों के साथ सदा रहने वाले विश्वेदेवों को उनका भाग अर्पण करो। ब्रह्माजी ने साक्षात् उनके अंशों की कल्पना की है। 23-24॥
‘Then Tapodhan! First of all, after reciting the Veda mantra, complete the process of Agnikaran - Agnikaran and always offer their share to Agni, Soma, Varun and the Vishwadevs who always live with the ancestors. Brahmaji has actually imagined their parts. 23-24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥