श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.93.22 
अथाख्यास्यामि ते पुत्र श्राद्धेयं विधिमुत्तमम्।
स्वयम्भुविहितं पुत्र तत् कुरुष्व निबोध मे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे पुत्रो, अब मैं तुम्हें स्वयंभू ब्रह्मा द्वारा बताई गई श्राद्ध की उत्तम विधि सुनाता हूँ। उसे सुनो और सुनने के बाद उसी विधि से श्राद्ध कर्म करो॥ 22॥
 
Son, I am now going to narrate to you the best method of performing Shraddha as told by Swayambhu Brahma. Listen to it and after listening to it, perform the Shraddha rituals according to this method.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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