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mahabharat 13.93.21: अतः तुमने ब्रह्माजी द्वारा प्रवर्तित धर्म का अनुष्ठान किया है। ब्रह्माजी के अतिरिक्त और कौन इस श्राद्धविधि का उपदेश कर सकता है?॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 13.93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.93.21 
सोऽयं स्वयम्भुविहितो धर्म: संकल्पितस्त्वया।
ऋते स्वयम्भुव: कोऽन्य: श्राद्धेयं विधिमाहरेत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अतः तुमने ब्रह्माजी द्वारा प्रवर्तित धर्म का अनुष्ठान किया है। ब्रह्माजी के अतिरिक्त और कौन इस श्राद्धविधि का उपदेश कर सकता है?॥ 21॥
 
‘Therefore you have performed the rites of the religion started by Lord Brahma. Who else other than Lord Brahma can preach this method of performing Shraddha?॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)