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mahabharat 13.93.19: आने पर जब अमर अत्रिना ने निमिको को पुत्र के शोक से व्याकुल देखा, तब उन्होंने मधुर वाणी से उसे बहुत आश्वासन दिया-॥19॥   |   mahabharat अध्याय 13.93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.93.19 
अथात्रिस्तं तथा दृष्ट्वा पुत्रशोकेन कर्षितम्।
भृशमाश्वासयामास वाग्भिरिष्टाभिरव्यय:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
आने पर जब अमर अत्रिना ने निमिको को पुत्र के शोक से व्याकुल देखा, तब उन्होंने मधुर वाणी से उसे बहुत आश्वासन दिया-॥19॥
 
On arrival, when the immortal Atrina saw Nimiko distraught with the grief of her son, she gave him a lot of assurance with a sweet voice -॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)