Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.93.18: ऐसा विचार करते ही उन्हें अपने वंश के संस्थापक अत्रि ऋषि का स्मरण हो आया। ऐसा विचार करते ही तपस्वी अत्रि वहाँ आ पहुँचे॥18॥ | mahabharat अध्याय 13.93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐसा विचार करते ही उन्हें अपने वंश के संस्थापक अत्रि ऋषि का स्मरण हो आया। ऐसा विचार करते ही तपस्वी अत्रि वहाँ आ पहुँचे॥18॥
As soon as he thought of this, he remembered the sage Atrika, the founder of his dynasty. As soon as he thought of this, the ascetic Atri arrived there.॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥